वर्तमान में हमारे समाज को क्षत्रिय राजपूत जाति से क्षत्रिय घांची जाति में परिवर्तित हुए 884 वर्ष हो गए लेकिन समाज की कोई राष्ट्रीय संस्था नही है क्यों ?सोचने की बात है क्या इस वजह से की हमारे समाज के लोग आपस में लड़ जाते है और उनमें गुट-वाद हावी हो जाता है समाज की जो भी छोटी मोटी संस्थाए है लेकिन उनके बीच कोई सम्बद्ध नहीं है या पैसे की कमी है समाज के लोग राजनीति में तो बहुत भाग लेते है पैर वो समाज का नेतृत्व कु नहीं करते क्या समाज से आप लोगो का कोई लेना देना नहीं 21वी शताब्दी में कोई भी समाज शिक्षा पर ध्यान देता है पर हमारे समाज में लड़कों के शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं देता क्यों जो भी इसे पढ़ रहा हो अपने मन मेंविचार जरूर करें क्यों आज भी किसी भी शहर में हमारे समाज के छात्रावास (नोरा/हॉस्टल) क्यों और जिस शहर मे हॉस्टल है वहाँ नाम-मात्र के छात्रावास हैं उनमे छात्रावास लायक तो सुविधा भी उपलब्ध नहीं है लेकिन उनमें किराया जरूर महीने वसूला जाता है आज समाज की कुछ संस्थाए जो जहाँ छात्रावास की जरुरत नहीं है वहाँ पर और खरीद रहे है जैसे कि पुष्कर में कौन जाता हैं...