Posts

Showing posts from 2018

क्षत्रिय घाँची समाज एकता की हकीकत

क्षत्रिय(घाँची) समाज का यदि किसी ने बड़ा नुकसान किया है तो वो खुद किसी क्षत्रिय(घाँची) ने ही किया है ,,,,,,, #समाज के उद्धार के लिए,, समाज को हक दिलाने के नाम पर  हजारो संगठन कुकुरमुतो की तरह खड़े कर दिये पर वो सच्चा, मैं झुठा की आपसी लड़ाई और फूट को देख कर समाज का आम आदमी बेचारा अपने आप को ठगा सा महसूस करता है #युग बीत गये, दुनिया बदल गई पर क्षत्रिय(घाँची) समाज के लोगो की  न तो खोखली शान बदली है न ही आपसी फूट बदली है,,,क्षत्रिय(घाँची) सदियों से अपने अहम/वहम अहंकार  में जीता आया है अपने आगे वो किसी की नहीं सुनता है और आज भी यही हो रहा है #सबको अपने अपने निजी हितो की पडी हैं समाज के हित किसी को नहीं दिख रहे हैं संगठनो के नाम पर एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का काम ही हो रहा है,,,,,,, समाज के  गौरवान्ति क्षत्रिय इतिहास व असली मुद्दों पर तो बेचारा साधारण क्षत्रिय(घाँची) लड रहा हैं जिसकी कोई सुनवाई नहीं है #बहुत से लोग हमे को कहते हैं आप युवा हो  फलाने संगठन में शामिल हों जाओ, इसमें आ जाओ, उसमें आ जाओ, ये सही है वो सही है,,,,,,,,,,,, मेरा जवाब हमेशा ना ही रहा हैं ,...

क्षत्रिय घाँची समाज

वर्तमान में अपने समाज के कुछ लोगो को समाज का पूरा नाम लिखने मे क्या परेशानी है उनको क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज लिखने में पता नही क्या दिक्कत होती है फिर यही लोग क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज के स्थापना दिवस पर समारोह का आयोजन करते है लेकिन जब स्थापना दिवस के समारोह के बैनरो पर सिर्फ घाँची समाज स्थापना दिवस लिखकर अपनी घटिया व ओछी मानसिकता का प्रदर्शन पुरे समाज के सामने कर देते है अगर आप लोगो को क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज के स्थापना दिवस के बैंनरो व पैम्पलेट पर क्षत्रिय लिखने मे शर्म आती है तो आप स्थापना दिवस का आयोजन ही क्यों कर रहे हो स्थापना दिवस तो क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज का होता है,, घाँची समाज का कोई स्थापना दिवस नही होता हैं फिर तो आपका यह स्थापना दिवस का आयोजन का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि स्थापना दिवस का अर्थ भी तो यही है कि हमारा समाज इस दिन क्षत्रिय राजपूत से क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज के रूप में अंगीकृत हुआ था उसी दिन को हम क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज का स्थापना दिवस के रूप में मनाते हैं अगर समाज में ऐसे कुछ लोगो को क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज लिखने में दिक्कत है या वे ...

क्षत्रिय घाँची राजपुत समाज की गोत्र

: " चौहान" का बाहुबल हो , " राठौड़ " का जोश हो , "सिसोदिया(गहलोत)" की सोच हो, " बोराणा " का शौर्य हो , " भाटी " की बाजू हो , " पंवार " का पानी हो , " सोंलकी " की समझ हो , " परिहार " का प्रहार हो , " देवडा " की दहाड़ हो , " परमार " जैसा महान हो , " दहिया " सा धीर हो , तो कसम " माँ भवानी " की पूरे के पूरे संसार पर " क्षत्रियो(घाँची) " का राज हो ।

क्षत्रिय घाँची समाज एकता के सूत्र

क्षत्रिय सरदार भवानी सेना द्वारा - क्षत्रिय(राजपूत) घाँची समाज  के एकता सूत्र (01) सभी क्षत्रिय(घाँची)एक रहो। (02) भगवान श्रीराम  को अपना ईष्ट मानें (03) छोटे छोटे संगठनों के क्षत्रिय(घाँची)कोष बनें! (04) कोष से गरीब क्षत्रिय(घाँची) परिवारोंं की मदद हो। (05) समाज का हर युवा कोई न कोई तकनीक सीखें! (06) क्षत्रिय(घाँची) अधिकारी,प्रधानाचार्य, नेता, उद्योगपति, कानून के अंदर समाज के काम को यथा संभव हो तो आगे बढ़कर मदद करे (07) डा. बी.आर अम्बेडकर के कारण,ओर नेहरू की नीतिओ के कारण हम क्षत्रियो(राजपुतो) का पतन हुआ है,इसलिए डाँ. बी.आर अम्बेडकर के विरुद्ध पंडित मदन मोहन मालवीय को खड़ा करें (08) पढ़े लिखे क्षत्रिय(घाँची)युवा  अपने समाज के राजपुत इतिहास को समाज के सामने लाये व समाज को अपने क्षत्रिय राजपुत होने के गर्व की अनुभूति करावे (09) आपसी सहयोग की भावना रखें, लेकिन पैसो ओर लेंन- देंन को व्यवहार कुशल अवश्य रखें (10) अपने क्षत्रिय/राजपूत होने पर गर्व करें ओर अपनी झूठी शान के लिए कोई भी अनैतिक कार्य न करे (11) सभी  अपने नाम के साथ सिंह व  अपनी गोत्र...

Kshatriya (ghanchi) samaj logo

Image