प्रधानमंत्री मोदी जी नही है क्षत्रिय घाँची समाज के उनका हमारे समाज से कोई सम्बन्ध नही आपने सही पढ़ा ऊपर की दो पंक्तियों में की मोदी जी का क्षत्रिय घाँची समाज से कोई वास्ता नही है ओर न ही यह मोदी गोत्र अपने क्षत्रिय घाँची समाज की गोत्र है पिछले 10-12 वर्षो के भीतर अचानक से अपने समाज वालो ने मोदी को अपनी जाति का बताने की होड़ सी मचाकर रखी है और बहुत से समाज बन्धु तो अपनी दादा परदादा की गोत्र लिखना छोड़कर यह मोदी गोत्र भी लिखने लग गये जो कि सरासर उनकी मुर्खता का प्रमाण है जब क्षत्रिय वंश 36 वंशो में बंटा हुआ था और उसके बाद चौहान वंश में पुनः 26 अलग अलग खापे/ शाखाये निकली तो बाद में क्षत्रिय वंश में कुल 62 वंश गिने जाने लगे जो एक दोहे द्वारा उल्लेखित है - दस रवि से दस चन्द्र से, बारह ऋषिज प्रमाण चार हुतासन सों भये , कुल छत्तिस वंश प्रमाण भौमवंश से धाकरे टांक नाग उनमान चौहानी चौबीस बंटि कुल बासठ वंश प्रमाण अथार्त -दस सूर्य वंशीय क्षत्रिय, दस चन्द्र वंशीय, बारह ऋषि वंशी एवं चार अग्नि वंशीय कुल छत्तिस क्षत्रिय वंशों का प्रमाण है, बाद में भौमवंश. , नागवंश क्षत...
क्षत्रिय लाटेचा राजपूत घाँची समाज भारत आज हम क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज के इतिहास की बात करेंगे यह मुल 8 कुल की 13 गोत्र के अहिलनवाड व लाट प्रदेश के क्षत्रिय राजपुतो द्वारा विक्रम संवत 1191 में महाराजा सिद्धराज जयसिंह सोलंकी के दरबार मे क्षत्रिय राजपुतों से क्षत्रिय घाँची अंगीकृत हुए थे इस घटना के संदर्भ में अहिलनवाड के राज दरबार ने राव रुद्र ने दोहा कहा था संवत इग्यारह सौ इकरानवे ज्येष्ठ तीज रविवार छत्रवट छोड़ क्षत्रि घाँची हुआ जयसिंघ रे दरबार वर्तमान में यह क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज मुख्यत इन क्षेत्रों में बसे हुए हैं राजस्थान के मारवाड़ में (यहाँ क्षत्रिय घाँची/ लाटेचा क्षत्रिय/ लाठिया सरदार) नाम से जाने जाते हैं , मेवाड़ में (कचेलियन क्षत्रिय घाँची कचेलियन शब्द राजपूतों से कच्चे घाँची बनने के कारण कचेलियन पहचान बन गई), मध्यप्रदेश में ( मारवाड़ा राजपुत नाम से जाने जाते है शाजापुर क्षेत्र में) गुजरात मे ( उतर गुजरात में व बनासकांठा , पाटण यहाँ क्षत्रिय घाँची नाम से ) इसतरह इस समाज के इन क्षेत्रों में निवासरत है और इन नामों से जाने जाते हैं क्षत्रिय घाँची नाम से क्षत्रिय वर्...
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