बोराणा ( तंवर वंश) शाखा का इतिहास
बोराणा/बोड़ाना ( तंवर वंश) शाखा का इतिहास
क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज मूल अहिलनवाड व लाट प्रदेश के राजपूत सरदारो द्वारा अंगीकृत समाज है
इस समाज मे बोराणा राजपूत सरदार मूल तंवर वंश के थे यह बोराणा तंवर वंश की शाखा है
#बोराणा - तंवर वंश की एक शाखा है यह मूल रूप से चन्द्रवंशी क्षत्रिय है यह पांडु पुत्र अर्जुन के पुत्र परीक्षित के वंशज है
तंवर बोराणा वंश की वंशावली - चंद्र - ययाति - पुरु - हस्ति - अजमीध - कुरु - शांतनु - विचित्रवीर्य - पांडु - अर्जुन - अभिमन्यु - - परीक्षित - जन्मेजय - अश्वमेघ - धर्मदेव - मनजीत – चित्ररथ - दीपपाल - उग्रसेन - सुरसेन - भूवनपति - रणजीत – रक्षकदेव - भीमसेन - नरहरिदेव – सुचरित्र - सुरसेन – पर्वतसेन – मधुक – सोनचीर - भीष्मदेव - नृहरदेव - पूर्णसेल - सारंगदेव – रुपदेव - उदयपाल - अभिमन्यु - धनपाल – भीमपाल - लक्ष्मीदेव – विश्रवा
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महाराज अनंगपाल प्रथम के पुत्र बोराणा के वंशज बोराणा कहलाये यही बोराणा राजपूत कहलाये
तंवर वंशी बोराणा के मूल पुरुष पांडु पुत्र अर्जुन इनका पुत्र परीक्षित व महाराजा अगनपाल प्रथम थे
तंवर वंशी बोराणा समाज की कुलदेवी
तँवर वँश की कुलदेवी चिलाय माताजी
तु संगती तंवरा तणी चावी मात चिलाय!
म्हैर करी अत मातथूं दिल्ली राज दिलाय!!
तँवर बोराणा वँश की कुलदेवी चिलाय माता है। इतिहास में तँवरो की कुलदेवी के अनेक नाम मिलते हैं जैसे चिलाय माता, जोग माया (योग माया), योगेश्वरी (जोगेश्वरी), सरूण्ड माता, मन्सादेवी आदि।
दिल्ली के इतिहास में तँवरो की कुलदेवी का नाम योग माया मिलता है, तंवरो के पुर्वज पांडवो ने भगवान कृष्ण की बहन को कुलदेवी मानकर इन्द्रप्रस्थ में कुलदेवी का मंदिर बनवाया और उसी स्थान पर दिल्ली के संस्थापक राजा अनंगपाल प्रथम ने पुनः योगमाया के मंदिर का निर्माण करवाया।
तंवर वंश कुलदेवी
जय माँ चिल्लाय माता
जय पाण्डुपुत्र अर्जुन
जय बोराणा तंवर समाज
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