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Showing posts from 2019

क्षत्रिय लाटेचा राजपुत घाँची व मोढ वणिक ब्रह्मपुरिया मोढ घाँची बनियो के इतिहास व उत्पति में अंतर

प्रधानमंत्री मोदी जी नही है क्षत्रिय घाँची समाज के उनका हमारे समाज से कोई सम्बन्ध नही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मोढ वणिक बनिया घाँची समाज से नाता रखते हैं इन्ही मोढ वणिक बनिये घाँची समाज से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी  धीरूभाई अंबानी , मुकेश अम्बानी नरेन्द्र मोदी यह सब मोढ वणिक बनिये घाँची है आपने सही पढ़ा ऊपर की दो पंक्तियों में की मोदी जी का क्षत्रिय घाँची समाज से कोई वास्ता नही है ओर न ही यह मोदी गोत्र अपने क्षत्रिय घाँची समाज की गोत्र है पिछले 10-12 वर्षो के भीतर अचानक से अपने समाज वालो ने मोदी को अपनी जाति का बताने की होड़ सी मचाकर रखी है और बहुत से समाज बन्धु तो अपनी दादा परदादा की गोत्र लिखना छोड़कर यह मोदी गोत्र भी लिखने लग गये जो कि सरासर उनकी मुर्खता का प्रमाण है जबकि सबको पता है कि हम क्षत्रियवंशी है व क्षत्रिय वंश 36 वंशो में बंटा हुआ था और उसके बाद चौहान वंश में पुनः 26 अलग अलग खापे/ शाखाये निकली तो बाद में क्षत्रिय वंश में कुल 62 वंश गिने जाने लगे जो एक दोहे द्वारा उल्लेखित है - दस रवि से दस चन्द्र से, बारह ऋषिज प्रमाण चार हुतासन सों भये  , कुल छत्तिस व...

क्षत्रियो का शास्त्र से नाता

शास्त्रों ने #क्षत्रियों को सम्पूर्ण रूप से समाज के प्रति उत्तरदायित्व निश्चित किया है। समाज में उत्पन्न होने वाली हर बुराई, अनाचार व अज्ञान के विरुद्ध लड़ना भी जहां क्षत्रिय का दायित्व के रूप में ही निश्चित किया गया है। तब प्रश्न यह उठता है कि इतने कठिन, जटिल, पुरुषार्थपूर्ण व विवेक सम्मत कार्य को करने के लिए प्रत्येक क्षत्रिय में गुणों का निर्माण कर उसे वास्तविक क्षत्रिय कौन बनाएगा।       #उपर्युक्त प्रश्न में ही #क्षत्राणी के कर्तव्य का उत्तर समाहित है। क्षत्रिय को विनाश से बचाना उसे दुर्गुणों, अज्ञान व प्रमाद से बचाकर उसे विकासोन्मुख बनाकर उसमें त्याग तपस्या शौर्य पराक्रम उदारता व क्षमाशीलता जैसे गुणों का प्रादुर्भाव करना ही क्षत्राणी का परम कर्तव्य है। #क्षत्राणी सैनिक नहीं है, सैनिकों की जननी है। वह रक्षक नहीं है, रक्षकों का निर्माण करने वाली निर्मात्री है। वह उपदेशक नहीं, ज्ञान का संचार करने वाली विलक्षण शक्ति है। इस दृष्टि से देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि क्षत्राणी का कर्तव्य यह है कि वह अपने घरों में सच्चे क्षत्रिय का निर्माण करें। #जय_क्षत्राणी 🚩🚩 #जयम...

क्षत्रिय जाति बनने की होड़ में सभी जातिया

वर्तमान में सभी जातियों में क्षत्रिय बनने की होड़ - आज जिस किसी जाति व समाज को देखो हर कोई अपने आप को क्षत्रिय साबित करने की कोशिश करता है चाहे व वैश्य वर्ण की जाति हो या शूद्र वर्ण की व कृषक वर्ग की सब खुद की जाती को क्षत्रिय लिखने व बताने लगते है लेकिन जब उनको पूछा जाता है कि क्षत्रिय यानी राजपुत तो उनके पास कोई जवाब नही होता है बस इतना बोलते है कि नही  केवल क्षत्रिय  ही है हम राजपुत नही,  फिर उनके समाज के राजाओं के नाम व उनकी रियासत के नाम पूछो तो उनको पता ही नही ओर न उनके वंश का नाम पता फिर भी स्वयं घोषित क्षत्रिय बने फिरते हैं जबकि न उनमे क्षत्रिय संस्कार होते है न  क्षत्रिय वाला काम ओर न क्षत्रिय धर्म का ज्ञान ओर न उसका पालन फिर भी फर्जी क्षत्रिय सभी जातिया बनने में लगी है यह सभी स्वयं घोषित क्षत्रिय बनने वालो के पास कोई जवाब नही होता तो यह सब हमारे क्षत्रिय/ राजपुत घाँची समाज पर सवाल उठाते हैं कि फिर तुम क्षत्रिय कैसे ओर तुम्हारे कौनसे राजा थे व कोनसी रियासत व वंश था तो उन तथाकथित फर्जी क्षत्रियो को बता दु कि हम क्षत्रिय ही नही अपितु क्षत्रिय राजपुत वंशी ह...

क्षत्रिय घाँची समाज की क्षत्रियत्व व हमारे पूर्वजो की रजपूती पर लगता वर्णसंकरता का लांछन

अरे हम क्षत्रिय घाँची, क्षत्रिय राजपूतो के वंसज है हमारे पूर्वज जिन्होंने अपनी रजपूती स्वाभिमान को लेकर कभी समझौता नहीं किया था और आज कुछ समाज बन्धु क्षत्रिय राजपुत घाँची वंशज होकर भी खुद के नाम के साथ मोदी लिख  तेलियों की जात में गुस्से जा रहे है कितने शर्म की बात है अपने समाज के संस्थापक राजपुत सरदारो ने क्या यही  सोच कर राजपुत घाँची समाज बनाया था ?  , कि उनके वंसज भविष्य में फेमस होने के लिए निचली शुद्रो  की तेली जाति में घुस कर उन तेलियों की गोत्रे लिख कर उनके रजपूती स्वाभिमान ओर रजपूती को मिटी में मिला देगे कितने शर्म की बात है पूरे क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज के स्वभिमानी राजपुत सरदारो के लिए क्या वर्तमान के सभी क्षत्रिय घाँची समाज के लोगों में उन्ही 14 गोत्र के 189 क्षत्रिय राजपुत सरदारो का खून है या किसी वर्णसंकर / मिलावट तो नही कर ली 884 वर्षो के अंतराल में ? जितने भी स्वाभिमानी क्षत्रिय राजपुत घाँची समाज बंधु है जिनको ऊपर लिखे गए शब्दों से ठेस पहुंची है तो उनसे क्षमा  चाहता है हमे पता कि आज भी बहुत से समाज बन्धु है जिनमे अपने पूर्वजो का क्षत्रिय स्व...

क्षत्रिय भवानी युवक संघ क्षत्रिय घाँची समाज का सामाजिक संगठन

क्षत्रिय भवानी युवक संघ ( क्षत्रिय भवानी सेना ) सभी समाज के युवाओं से निवेदन कि इस संगठन का एकमात्र उद्देश्य है कि समाज के लिये धरातल पर समाज में परिवर्तन व विकास से जुड़े कार्य करना  इसलिए वही  क्षत्रिय भवानी सेना में वही जुड़े जो समाज में बदलाव सोशल मीडिया पर ही नही धरातल पर बदलाव लाना चाहते है व दुसरो के भरोसे रहने की बजाय खुद समाज मे परिवर्तन लाने को तैयार हो सभी 5 संभाग जोधपुर , जालोर, सिरोही, पाली , भीनमाल,सुमेरपुर, बालोतरा, बाली, सांचौर  सभी जगह के क्षत्रिय घाँची समाज के युवाओं से निवेदन है कि आप इस संगठन से जुड़े ताकि हमारे समाज के क्षेत्रवाद तक समिति रहने की बजाय सभी जगह से जुड़ सके व अपने समाज के ऐसे मुद्दे उठा सके व परिवर्तन ला सके जिसमे सभी क्षेत्रों में रहने वाले समाज बंधुओ को लाभ मिल सके क्षत्रिय भवानी सेना का नाम क्षत्रिय भवानी युवक संघ इसलिए बदला गया है ताकि अपने संगठन का रजिस्ट्रेशन करवाया जा सके क्योंकि सेना नाम से सरकार रजिस्टर्ड नही कर रही है तो हमने क्षत्रिय भवानी युवक संघ नाम कर दिया है ताकि अपने संगठन का रजिस्ट्रेशन हो सके जिसके माध्यम से हम बदलाव...

क्षत्रिय घाँची समाज के संस्थापक राजपुत राजवंश की वंशावली

क्षत्रिय घाँची अंगीकृत पूर्व क्षत्रिय राजपुत वंशावली व इतिहास अथवा अंगीकृत राजपुत घाँची समाज के राजाओं की वंशावली इतिहास गुजरात के चालुक्य नरेश कर्ण और मयणल्लदेवी का पुत्र जयसिंह सिद्धराज (1094-1143 ई) कई अर्थों में उस वंश का सर्वश्रेष्ठ सम्राट् था। सिद्धराज उसका विरुद था। उसका जन्म 1094 ई. में हुआ था। पिता की मृत्यु के समय वह अल्पवयस्क था अतएव उसकी माता मयणल्लदेवी ने कई वर्षों तक अभिभाविका के रूप में शासन किया था। वयस्क होने और शासनसूत्र सँभालने के पश्चात् जयसिंह ने अपना ध्यान समीपवर्ती राज्यों की विजय की ओर दिया। अनेक युद्धों के अनंतर ही वह सौराष्ट्र के आभीर शासक नवघण अथवा खंगार को पराजित कर सका। विजित प्रदेश के शासन के लिए उसने सज्जन नाम के अधिकारी को प्रांतपाल नियुक्त किया किंतु संभवत: जयसिंह का अधिकार चिरस्थायी नहीं हो पाया। जयसिंह ने चालुक्यों के पुराने शत्रु नाडोल के चाहमान वंश के आशाराज को अधीनता स्वीकार करने और सामंत के रूप में शासन करने के लिए बाध्य किया। उसने उत्तर में शाकंभरी के चाहमान राज्य पर भी आक्रमण किया और उसकी राजधानी पर अधिकार कर लिया। किंतु एक कुशलनीतिज्ञ के समा...

क्षत्रिय घाँची समाज की एकता में मुख्य क्षेत्रवाद की समस्या है

पहले क्षेत्रवाद को छोड़ो कि वो पाली का है और हम जालोर के तो उनसे अपने को क्या करना दूसरा अपना समाज मोदी राग अलाप बंद करे क्यों बार बार तेलियों को अपने क्षत्रिय समाज के साथ जोड़ रहे हो बंद करो खुद को मोदी तेली लिखना समाज की सभी समितिया फंक्शन करवाती है तो अपने निमंत्रण पत्रिकाओं पर उस बनिये मोदी तेली को क्षत्रिय घाँची समाज का गौरव लिखना बंद करो वो बनिया तेलियों का गौरव है फिर उसको आप क्यों जबरदस्ती क्षत्रिय समाज मे गुस्सा रहे हो और बात एकता की करते हो जब तक जिसमे शुद्ध रक्त नही होगा उससे समाज एकता की आशा करने का कोई मतलब नही क्योंकि उस वर्णसंकर पैदाइश में शुद्ध क्षत्रिय खून ही नही है तो वो क्षत्रिय एकता की बात कैसे हजम कर लेगा इसलिए पहले यह mp up से पैसे देकर  की औरतों को लाकर उनको फ़र्ज़ी क्षत्रिय घाँची बनाना व बताना बन्द करो क्योंकि इन mp up की औरतों से पैदा हुई औलाद से सिर्फ रक्त ही अशुद्ध व मिक्स होगा जब इन औलादो को क्षत्रिय घाँची समाज मे विवाह किया जाएगा और यही mp ,up की  की औरतों से  पैदा हुए खुद ही फ़र्ज़ी मोदी बने फिरते हैं क्योंकि इनका तो खून ही मिक्स होता है पर...

सोमनाथ महादेव क्षत्रिय घाँची सरदारो के इष्टदेव क्षत्रिय/राजपुत घाँची सरदार

क्षत्रिय घाँची समाज का सोमनाथ महादेव जो कि उनके पूर्वज राजपुत सरदारो के इष्टदेव भी थे जिनको उनके पूर्वज जब 800 वर्ष पूर्व अहिलनवाड़ा में रहते थे तब सभी राजपुत सोमनाथ से खास लगाव रखते थे पाली में स्थित सोमनाथ मंदिर के निर्माण में क्षत्रिय घाँची समाज के राजा कुमारपालसिंह ने  जब अपना राज्य विस्तार जैसलमेर तक किया था तब उन्होंने तत्कालीन पाली में अपने भाई बंधुओ क्षत्रिय घाँची समाज के लिए अपने इष्टदेव सोमनाथ महादेव मंदिर निर्माण अपने राजकोषीय व्यय से क्षत्रिय घाँची सरदारो को देकर करवाया था ताकि उनके क्षत्रिय घाँची सरदार यहाँ रहते हुए भी अपने इष्टदेव सोमनाथ महादेव की स्तुति कर सके और इस घटना का उल्लेख इतिहास में भी मिलता है लेकिन वर्तमान में अपना क्षत्रिय घाँची समाज अपने इष्टदेव  सोमनाथ महादेव को भूल गया है और पाली के सोमनाथ मंदिर की रख रखाव में योगदान देना बंद कर दिया है ओर सोमनाथ महादेव की पूजा भी करनी बन्द कर दी है जबकि जैसे मेवाड़ राजपरिवार के लिए एकलिंग जी इष्टदेव है उसी प्रकार अहिलनवाड़ा के क्षत्रिय घाँची  व दूसरे वहाँ के सभी राजपूतो के लिये सोमनाथ महादेव इष्टदेवता थे...

क्षत्रिय वंशावली क्षत्रिय (घाँची) समाज

क्षत्रिय अथार्त  क्षत्रिय  राजन्य राजपुत्र/राजपुत हिन्दु  क्षत्रिय /राजपुत  घाँची समाज सभी क्षत्रिय घाँची समाज के भाइयो आप भी जाने की क्षत्रिय कौन होता है क्षत्रिय क्या है ? हम क्षत्रिय घाँची क्यों लिखते है क्षत्रिय का मतलब क्षति से जो समाज की रक्षा करे वो क्षत्रिय गीता में क्षत्रियो के  लिए  कहा  गया  है :- शौर्यंतेजा धृतिर्दाक्ष्यं युद्वे चाप्यपलायनम्। दानमीश्वरभाववश्रच् क्षात्रं कर्म स्वभावजम्।। शूरवीरता, तेज, धैर्य, चतुरता और युद्ध में से न भागना, दान देना और स्वाभिमान - ये सब के सब ही क्षत्रिय के स्वाभाविक कर्म हैं ।। क्षत्रिय वंश की शाखाएं (kshatriya clans/branches) दस रवि से दस चन्द्र से, बारह ऋषिज प्रमाण चार हुतासन सों भये  , कुल छत्तिस वंश प्रमाण भौमवंश से धाकरे टांक नाग उनमान चौहानी चौबीस बंटि कुल बासठ वंश प्रमाण.” अर्थ:-दस सूर्य वंशीय क्षत्रिय,   दस चन्द्र वंशीय, बारह ऋषि वंशी एवं चार अग्नि वंशीय कुल छत्तिस क्षत्रिय वंशों का प्रमाण है, बाद में भौमवंश. , नागवंश क्षत्रियों को सामने करने के बाद जब ...

क्षत्रिय घाँची समाज इतिहास

प्रधानमंत्री मोदी जी नही है क्षत्रिय घाँची समाज के उनका हमारे समाज से कोई सम्बन्ध नही आपने सही पढ़ा ऊपर की दो पंक्तियों में की मोदी जी का क्षत्रिय घाँची समाज से कोई वास्ता नही है ओर न ही यह मोदी गोत्र अपने क्षत्रिय घाँची समाज की गोत्र है पिछले 10-12 वर्षो के भीतर अचानक से अपने समाज वालो ने मोदी को अपनी जाति का बताने की होड़ सी मचाकर रखी है और बहुत से समाज बन्धु तो अपनी दादा परदादा की गोत्र लिखना छोड़कर यह मोदी गोत्र भी लिखने लग गये जो कि सरासर उनकी मुर्खता का प्रमाण है जब क्षत्रिय वंश 36 वंशो में बंटा हुआ था और उसके बाद चौहान वंश में पुनः 26 अलग अलग खापे/ शाखाये निकली तो बाद में क्षत्रिय वंश में कुल 62 वंश गिने जाने लगे जो एक दोहे द्वारा उल्लेखित है - दस रवि से दस चन्द्र से, बारह ऋषिज प्रमाण चार हुतासन सों भये  , कुल छत्तिस वंश प्रमाण भौमवंश से धाकरे टांक नाग उनमान चौहानी चौबीस बंटि कुल बासठ वंश प्रमाण अथार्त -दस सूर्य वंशीय क्षत्रिय,   दस चन्द्र वंशीय, बारह ऋषि वंशी एवं चार अग्नि वंशीय कुल छत्तिस क्षत्रिय वंशों का प्रमाण है, बाद में भौमवंश. , नागवंश क्षत...