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क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज का इतिहास पुस्तक भाग 2

 

उत्तर गुजरात , बनासकांठा व पाटण के 28 गाँव मे क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज

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“क्षत्रिय घाँची समाज: मारवाड़, मेवाड़, मध्यप्रदेश और गुजरात में समाज की पहचान”

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राजा जयसिंह के दरबार से जुड़ा क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज का इतिहास और राव रुद्र का वो प्रसिद्ध दोहा

क्षत्रिय लाटेचा राजपूत घाँची समाज भारत आज हम क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज के इतिहास की बात करेंगे यह मुल 8 कुल की 13 गोत्र के अहिलनवाड व लाट प्रदेश के क्षत्रिय राजपुतो द्वारा विक्रम संवत 1191 में महाराजा सिद्धराज जयसिंह सोलंकी के दरबार मे क्षत्रिय राजपुतों से क्षत्रिय घाँची अंगीकृत हुए थे इस घटना के संदर्भ में अहिलनवाड के राज दरबार ने राव रुद्र ने दोहा कहा था संवत इग्यारह सौ इकरानवे ज्येष्ठ तीज रविवार छत्रवट छोड़ क्षत्रि घाँची हुआ जयसिंघ रे दरबार वर्तमान में यह क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज मुख्यत इन क्षेत्रों में बसे हुए हैं राजस्थान के मारवाड़ में (यहाँ क्षत्रिय घाँची/ लाटेचा क्षत्रिय/ लाठिया सरदार) नाम से जाने जाते हैं , मेवाड़ में (कचेलियन क्षत्रिय घाँची कचेलियन शब्द राजपूतों से कच्चे घाँची बनने के कारण कचेलियन पहचान बन गई), मध्यप्रदेश में ( मारवाड़ा राजपुत नाम से जाने जाते है शाजापुर क्षेत्र में) गुजरात मे ( उतर गुजरात में व बनासकांठा , पाटण यहाँ क्षत्रिय घाँची नाम से ) इसतरह इस समाज के इन क्षेत्रों में निवासरत है और इन नामों से जाने जाते हैं क्षत्रिय घाँची नाम से क्षत्रिय वर्...

बोराणा ( तंवर वंश) शाखा का इतिहास

बोराणा/बोड़ाना ( तंवर वंश) शाखा का इतिहास क्षत्रिय लाटेचा घाँची समाज मूल अहिलनवाड व लाट प्रदेश के राजपूत सरदारो द्वारा अंगीकृत समाज है इस समाज मे बोराणा राजपूत सरदार मूल तंवर वंश के थे यह बोराणा तंवर वंश की शाखा है #बोराणा - तंवर वंश की एक शाखा है यह मूल रूप से चन्द्रवंशी क्षत्रिय है यह पांडु पुत्र अर्जुन के पुत्र परीक्षित के वंशज है तंवर बोराणा वंश की वंशावली - चंद्र - ययाति - पुरु - हस्ति - अजमीध - कुरु - शांतनु - विचित्रवीर्य - पांडु - अर्जुन - अभिमन्यु - - परीक्षित - जन्मेजय - अश्वमेघ - धर्मदेव - मनजीत – चित्ररथ - दीपपाल - उग्रसेन - सुरसेन - भूवनपति - रणजीत – रक्षकदेव - भीमसेन - नरहरिदेव – सुचरित्र - सुरसेन – पर्वतसेन – मधुक – सोनचीर - भीष्मदेव - नृहरदेव - पूर्णसेल - सारंगदेव – रुपदेव - उदयपाल - अभिमन्यु - धनपाल – भीमपाल - लक्ष्मीदेव – विश्रवा मुरसेन – वीरसेन – आनगशायी – हरजीतदेव -सुलोचन देव –कृप - सज्ज -अमर –अभिपाल – दशरथ – वीरसाल - केशोराव – विरमाहा – अजित – सर्वदत्त – भुवनपति – वीरसेन – महिपाल - शत्रुपाल – सेंधराज --जीतपाल --रणपाल - कामसेन – शत्रुमर्दन -जीवन – हरी...

क्षत्रिय घाँची समाज का संक्षिप्त इतिहास पुस्तक भाग - 1